अन्याय हर तरफ फैला है
पूंजी का बोलबाला है
सच का सर्वत्र मुँह काला है
पूंजी का बोलबाला है
सच का सर्वत्र मुँह काला है
ये हालात तो बदलने ही होंगे
बदलाव के हालात बनाने होंगे
बदलाव के हालात बनाने होंगे
तभी तो इंकलाब आएगा
हर जन अपना हक पाएगा
हर जन अपना हक पाएगा
पर उसके पहले बहुत से काम
जो अभी तक पूरे नहीं हुए
वो सब के सब निपटाने होंगे
जो अभी तक पूरे नहीं हुए
वो सब के सब निपटाने होंगे
वो कोने में जिसे अधमरा करके
बड़े दिनों से डाल रखा है
वो अब भी, हद है आखिर,
कभी-कभार बड़-बड़ किए रहता है
बड़े दिनों से डाल रखा है
वो अब भी, हद है आखिर,
कभी-कभार बड़-बड़ किए रहता है
उसे सबक सिखाना होगा
उसके भौंकने को बंद कराना होगा
पहला बड़ा काम तो यही है
इसके बिना आगे कैसे बढ़ सकते हैं?
उसके भौंकने को बंद कराना होगा
पहला बड़ा काम तो यही है
इसके बिना आगे कैसे बढ़ सकते हैं?
फिर आपस के झगड़े भी तो हैं
तगड़े हैं, एक से एक बढ़ के हैं
एक-दूसरे को सबक सिखाना होगा
एक-दूसरे का भौंकना बंद कराना होगा
तगड़े हैं, एक से एक बढ़ के हैं
एक-दूसरे को सबक सिखाना होगा
एक-दूसरे का भौंकना बंद कराना होगा
दूसरा बड़ा काम यह भी तो है
इसके बिना आगे कैसे बढ़ सकते हैं?
इसके बिना आगे कैसे बढ़ सकते हैं?
फिर कुछ डरे सहमे
असुरक्षित लोगों ने
अपनी बुद्धि का
अपने ज्ञान का
और तो और
अपनी प्रतिभा का!
(हद है!, हद है!
कितनी अकड़ है!)
आतंक फैला रखा है
यहीं, इंकलाबियों के बीच!
असुरक्षित लोगों ने
अपनी बुद्धि का
अपने ज्ञान का
और तो और
अपनी प्रतिभा का!
(हद है!, हद है!
कितनी अकड़ है!)
आतंक फैला रखा है
यहीं, इंकलाबियों के बीच!
उनका मटियामेट कर के ही
सच्चे इंकलाबी दम ले सकते हैं
उन्हें अपने साथ लाकर नहीं
सच्चे इंकलाबी दम ले सकते हैं
उन्हें अपने साथ लाकर नहीं
एक तीसरा बड़ा काम यह जो है
इसके बिना आगे कैसे बढ़ सकते हैं?
इसके बिना आगे कैसे बढ़ सकते हैं?
ऐसे कितने ही काम और हैं
जिन्हें निपटाना है
इंकलाब के पहले
जिन्हें निपटाना है
इंकलाब के पहले
इसी से याद आया
एक काम तो यही है
कि इन कामों में
जो अड़चन पहुँचाए
उसे हड़का-हड़का के
आपसी झगड़े
ज़रा देर को भुला के
मिल-जुल कर
ऊपर पहुँचाया जाए
एक काम तो यही है
कि इन कामों में
जो अड़चन पहुँचाए
उसे हड़का-हड़का के
आपसी झगड़े
ज़रा देर को भुला के
मिल-जुल कर
ऊपर पहुँचाया जाए
इसके बिना आगे कैसे बढ़ सकते हैं?
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