Monday, April 23, 2012

नया सवेरा लाना है

शुभ प्रभात मित्रों प्रस्तुत आज की भोर कविता 
नया सवेरा लाना है:-

चीर कर अँधेरा अब उजालों में कदम बढाना हैं,
कर रात को विदा अब नया सवेरा लाना हैं.

रोशन हो हर घर का आँगन,
कहीं न छाए मायूसी,
हर बच्चे बूढ़े के होठों पे,
छाए सच्ची ख़ुशी.

रोती आँखों के आंसू को भी अब मुस्काना हैं,
कर रात को विदा अब नया सवेरा लाना हैं.

शिक्षित हो हर भारतवासी,
बेकारी बन न पाये फांसी,
भूखमरी और लाचारी से,
न छाए चहरों पे उदासी.

सोने की चिडियां हमकों फिर से कहलाना हैं,
कर रात को विदा अब नया सवेरा लाना हैं.

सत्ता के गलियारों में,
भ्रष्टाचार का हो विनाश,
सरहदों को पार कर,
आतंकवाद न आये पास.

दहशत गर्दों को भी अब शांतिदूत बनाना हैं,
कर रात को विदा अब नया सवेरा लाना हैं....!!



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