Tuesday, May 1, 2012


जिस दिन भूख बगावत वाली सीमा पर आ जायेगी |
उस दिन भूखी जनता सिंहासन को भी खा जाती है...||

मेरी पीढ़ी वालो जागो तरुणाई नीलाम न हो
इतिहासों के शिला लेख पर कल यौवन बदनाम न हो

अपने लोहू में नाखून डुबोने को तैयार रहो
अपने सीने पर कातिल लिखवाने को तैयार रहो

हम गाँधी की राहों से हटते हैं तो हट जाने दो
अब दो - चार भ्रष्ट कांग्रेसी नेता कटते हैं तो कट जाने दो

हम समझौतों की चादर को और नहीं अब ओढेंगे
जो भारत माँ के आँचल को फाड़े हम वो हर बाजू तोड़ेंगे

अपने घर में कोई भी जयचंद नहीं अब छोड़ेंगे
हम गद्दारों को चुन-चुन कर दीवारों में चिन्वायेंगे

बागी हैं हम इन्कलाब के गीत सुनाते जायेंगे
बागी हैं हम इन्कलाब के गीत सुनाते जायेंगे


!!... अब याचना नहीं रण होगा और रण बड़ा भीषण होगा ...!!


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