Saturday, August 6, 2011

"हमारे दरम्यां1 अब वो करार ना रहा"

हमारे दरम्यां1 अब वो करार ना रहा,
मजरूह2 दिलों में सुकुं-औ-करार ना रहा।

शबे-हिज्र हो के शबे-वस्ल,4 क्या करें,
तेरे होते ये दिल बेकरार ना रहा।

कुछ अश्‍कों में कुछ गजलों में उतर गया,
तेरे मुताल्लिक5 दिल में अब गुबार ना रहा।

कुछ तो हासिल होता सोहबते-ईश्‍क6 में,
तेरी चारागरी7 में अबके ऐतबार ना रहा।

दीदारे-यार8 में होती हैं ऑंखें पुरनम,
अब पहले-पहल सा दीदार ना रहा।

वही ऑंखें, वही है नशा, हो रहीं मुलाकातें,
पहली मुलाकात सा वो खुमार ना रहा।

अजीब उलझी सी रहती है हालत हमारी,
जब से उनका दर्द दिल में शुमार ना रहा।

1. बीच 2. जायल 3. वियोग की बात 4. मिलन की रात 5. तुझसे जुड़ा हुआ
6. प्रेम की संगत में 7. पथ प्रदर्शन 8. यार के दर्शन

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