मिजाजे-मौसम का क्या ठिकाना,
जैसे तेरा होता है आना जाना।
ठहरे हैं आज अश्क पलकों में,
ऐ बादल, तुम कल आ जाना।
बेभाव बिकता है यहां इमान,
उसे खरीदने तुम भी आ जाना।
अंधेरा बहुत है बस्ती-ए-दिल में,
यादों के चंद चराग जला जाना।
खूब मिल तो आज रात हमसे,
क्या खबर कल है कहां जाना।
फासले दिलों के बहुत है यहां,
कभी मोहब्बत जताने आ जाना।
आंसू बहाते बेकसी के मजार में,
किसी शाम शमां जला जाना।
ईश्क के मौके बहुत है यहां,
कभी फुरसत में तुम आ जाना ।
जैसे तेरा होता है आना जाना।
ठहरे हैं आज अश्क पलकों में,
ऐ बादल, तुम कल आ जाना।
बेभाव बिकता है यहां इमान,
उसे खरीदने तुम भी आ जाना।
अंधेरा बहुत है बस्ती-ए-दिल में,
यादों के चंद चराग जला जाना।
खूब मिल तो आज रात हमसे,
क्या खबर कल है कहां जाना।
फासले दिलों के बहुत है यहां,
कभी मोहब्बत जताने आ जाना।
आंसू बहाते बेकसी के मजार में,
किसी शाम शमां जला जाना।
ईश्क के मौके बहुत है यहां,
कभी फुरसत में तुम आ जाना ।
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