Tuesday, January 17, 2012


उन्हे शौक बदनाम करनेका है
हमे शौक बदनाम होनेका है
 
न मिलना,न चिठ्ठी,नही जिक्र भी
इरादा हमे अब भुलानेका है

 
पलटके जो देखा पशेमॉं है वो
नया खेल नजरे चुरानेका है 
 
घटासे वो बरसे,हवाओमें बोले
बहाना हमे ये सतानेका है

 
खुशीका है भूली वो इजहार भी
ये अंदाज गर मुस्कुरानेका है
 
कभी अक्स देखे तो हस लेते है
हमीसे हमे गम छुपानेका है

 
लिपट जाती है भीगी बेलासी वो
यही लुफ़्त उनको मनानेका है
 
कभी दूरिया भी हो हममें सनम
समय वो दिलोंको परखनेका है
  
न मुझको पता है,न तुमको खबर”
’है कुछ बात’...कहना जमानेका है
 
मुझे जानना ना है मुमकिन तुम्हे
ये चेहरा मेरा बस दिखानेका है

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