आज भी विरूद्ध आसमान है,
न्याय का यही नया विधान है,
काटते रहो वही किया नहीं,
जो किया सही कभी हुआ नहीं,
प्रश्न उठ रहे हरेक ओर से,
उत्तरों से शून्य ये जहान है,
आज भी विरूद्ध आसमान है,
न्याय का यही नया विधान है |
इन्तजार कब तलक किया करें,
बार बार मर के हम जिया करें,
कौन रच रहा है आज साजिशें,
मरने पे कौन आज जान है,
आज भी विरूद्ध आसमान है,
न्याय का यही नया विधान है |
न्याय का यही नया विधान है,
काटते रहो वही किया नहीं,
जो किया सही कभी हुआ नहीं,
प्रश्न उठ रहे हरेक ओर से,
उत्तरों से शून्य ये जहान है,
आज भी विरूद्ध आसमान है,
न्याय का यही नया विधान है |
इन्तजार कब तलक किया करें,
बार बार मर के हम जिया करें,
कौन रच रहा है आज साजिशें,
मरने पे कौन आज जान है,
आज भी विरूद्ध आसमान है,
न्याय का यही नया विधान है |
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