Tuesday, January 17, 2012

इस भारत देश महान का 
क्या होगा हिन्दुस्तान का 

धर्म गुलाम बना रखा है धर्म के ठेकेदारों ने 
जात पात का भेद छुपा है राजनीती के नारों में 
चीर हरण होते देखे है हमने बीच बाजारों में
रोज नए घोटाले यारो पढ़ते है अखबारों में

ढंग बदला है इंसान का
क्या होगा हिन्दुस्तान का

धन की देवी लक्ष्मी के चेहरे पे कालिख पोती है
बंध विदेशी तालो में अपने लालो को रोती है
जागा है शैतान, देवी सविधान की सोती है
करता है इन्तेजार जमाना प्रलय कैसी होती है

रहे धोखा अपनी जान का
क्या होगा हिन्दुस्तान का

रिश्वत का है दौर- ए- जमाना हर कोई रिश्वत लेता है
कोई छोटी रिश्वत लेता है कोई मोती रिश्वत लेता है
जब कोई रिश्वत देता है तो हर कोई रिश्वत लेता है
क्यों रोता है रिश्वत को जब तू ही रिश्वत देता है

सब चक्कर जान पहचान का
क्या होगा हिन्दुस्तान का

देश तभी सुधरेगा पहले बदलो अपने आप को
दंश तो पक्का मारेगा क्यों दूध पिलाते साप को
कोई दुश्मन टिक पाए ना बदलो जरा अलाप को
आतंकवाद का नाश करेंगे बोल दो उसके बाप को

जो काटे शीश शैतान का
वो होगा हिन्दुस्तान का

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