Monday, January 16, 2012

हँस रहे हो तुम मगर उदास क्यों,
वेगवान इस नदी में प्यास क्यों,
रात में न जाग आँख बंद कर,
दर्द भी कभी कभी पसंद कर,
तिलमिलाहटों को रख परे जरा,
मुस्कुराहटों की हद बुलन्द कर,
भूल जा जखम मिले तुझे कभी,
दो युगों के बाद न्याय आस क्यों,
हँस रहे हो तुम मगर उदास क्यों,
वेगवान इस नदी में प्यास क्यों |

लाख कर जतन मगर मिले नहीं,
जिंदगी मिले अमन मिले नहीं,
युद्ध की विभीषिका मनन में है,
रक्त आज मेरे आचमन में है,
प्राण तज रहें है शूरवीर अब,
खून की है इस धरा को प्यास क्यों,
हँस रहे हो तुम मगर उदास क्यों,
वेगवान इस नदी में प्यास क्यों |

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