मन मचल रहा था जाने क्यों,
इस बार जुदाई होनी थी,
तुमको आना था जीवन में,
अब नींद पराई होनी थी |
तुम रूपवती तो हो लेकिन,
मन की सुंदरता मोह गयी,
जब नयन मिले तुमसे उस क्षण,
पथ आत्म-चेतना छोड़ गयी,
तुम समझ गयी अब तो मेरी,
घर-बार बुराई होनी थी,
तुमको आना था जीवन में,
अब नींद पराई होनी थी |
तन पुलकित होना भूल गया,
मन हर्षित ना हो पाया था,
तुमको सम्मुख पाकर भटका,
मन राह नहीं फिर पाया था,
मै जान गया तुझको पाकर,
अब खूब हँसाई होनी थी,
तुमको आना था जीवन में,
अब नींद पराई होनी थी |
इस बार जुदाई होनी थी,
तुमको आना था जीवन में,
अब नींद पराई होनी थी |
तुम रूपवती तो हो लेकिन,
मन की सुंदरता मोह गयी,
जब नयन मिले तुमसे उस क्षण,
पथ आत्म-चेतना छोड़ गयी,
तुम समझ गयी अब तो मेरी,
घर-बार बुराई होनी थी,
तुमको आना था जीवन में,
अब नींद पराई होनी थी |
तन पुलकित होना भूल गया,
मन हर्षित ना हो पाया था,
तुमको सम्मुख पाकर भटका,
मन राह नहीं फिर पाया था,
मै जान गया तुझको पाकर,
अब खूब हँसाई होनी थी,
तुमको आना था जीवन में,
अब नींद पराई होनी थी |
No comments:
Post a Comment